Shayari: 10,000+ Best Hindi Shayari Collection of 2019

901. तुम शब्दों की जादूगर हो, मै ख़ामोशी का सौदागर हू, तुम ने जब चाहा, जो चाहा, कह दिया, मै हर बार, हर बात हंस कर सह गया।

902. गम के अंधेरों में खुद को बेकरार ना कर सुबह जरूर आएगी सुबह का इंतजार कर |

903. यूँ पलके बिछा कर तेरा इंतज़ार करते है, यह वो गुनाह है जो हम बार बार करते है, जलकर हसरत की राह पर चिराग, हम सुबह और शाम तेरे मिलने का इंतज़ार करते है |

904. ना जाने कौन सी बात आखरी होगी, ना जाने कौन सी रात आखरी होगी, करनी हैं तो कर लो जी भरकर बाते, ना जाने हमारी कौन सी सास आखरी होगी ।

905. यह मुस्कुराती हुई आँखें जिनमें रक्स करती है बहार, शफक की, गुल की, बिजलियों की शोखियाँ लिये हुए।

906. हमारी गलतियों से कही टूट न जाना, हमारी शरारत से कही रूठ न जाना, तुम्हारी चाहत ही हमारी जिंदगी हैं, इस प्यारे से बंधन को भूल न जाना |

907. वादे पे वो ऐतबार नहीं करते, हम जिक्र मौहब्बत सरे बाजार नहीं करते, डरता है दिल उनकी रुसवाई से, और वो सोचते हैं हम उनसे प्यार नहीं करते।

908. उस घड़ी देखो उनका आलम नींद से जब हों बोझल आँखें, कौन मेरी नजर में समाये देखी हैं मैंने तुम्हारी आँखें।

909. तुझे कुछ इस तरह सजाएंगे, चाँद नहीं अपनी कायनात बनाएंगे, तोड़ना-टूटना, ये दिल की अदा है, तुझे हम अपनी रूह मे समाएंगे |

910. एक अजीब दास्तान है मेरे अफसाने की, मैने पल पल कोशिश उसके की पास जाने की, किस्मत थी मेरी या साजिश थी ज़माने की, दूर हुई मुझसे इतना जितनी उमीद थी करीब आने की |

911. जाने क्यों डूब जाता हूँ हर बार इन्हें देख कर, इक दरिया हैं या पूरा समंदर हैं तेरी आँखें।

912. राज ये दिल मै छुपा रखा है, तुम्हे अपना बना रखा है, कैसे हो जुदा तुमसे हम, तुम्हे ज़िन्दगी बना रखा है|

913. पास आकर सभी दूर चले जाते हैं; अकेले थे हम, अकेले ही रह जाते हैं; इस दिल का दर्द दिखाएँ किसे; मल्हम लगाने वाले ही जखम दे जाते हैं |

914. निगाहों से कत्ल कर दे न हो तकलीफ दोनों को, तुझे खंजर उठाने की मुझे गर्दन झुकाने की।

915. दिल की यादो मै सवारूँ तुझे, तू दिखे तो आँखो मै उतारू तुझे, तेरे नाम को लबो पर ऐसे सजाऊ, सो जाऊ तो ख्वाबो मे पुकारू तुझे |

916. और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा, मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा, यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार, प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा |

917. एक सी शोखी खुदा ने दी है हुस्नो-इश्क को, फर्क बस इतना है वो आंखों में है ये दिल में है।

918. रात हुई जब शाम के बाद, तेरी याद आई हर बात के बाद, हमने खामोश रहकर भी देखा, तेरी आवाज़ आई हर सांस के बाद |

919. जीना चाहा तो जिंदगी से दूर थे हम मरना चाहा तो जीने को मजबूर थे हम सर झुका कर कबूल कर ली हर सजा बस कसूर इतना था कि बेकसूर थे हम।

920. उसकी कुदरत देखता हूँ तेरी आँखें देखकर, दो पियालों में भरी है कैसे लाखों मन शराब।

921. शक का कोई ईलाज नहीं होता, जो यकीं करता है कभी नराज नहीं होता, वो पूछते है हमसे कितना प्यार करते हो, उन्हे क्या पता मौहाबत का हिसाब नहीं होता |

922. उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है! जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है! दिल टूटकर बिखरता है इस कदर! जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!

923. रात बड़ी मुश्किल से खुद को सुलाया है मैंने, अपनी आँखों को तेरे ख्वाब का लालच देकर।

924. छुपा लूंगा तुझे इसतरह से बाहों में, हवा भी गुज़रने के लिए इज़ाज़त मांगे, हो जाऊं तेरे इश्क़ में मदहोश इस तरह, कि होश भी वापस आने के इज़ाज़त मांगे |

925. कभी कभी मेरी आँखे यूँ ही रो पडती है, मै इनको कैसे समझाऊँ, कि कोई शक्स सिर्फ चाहने से ही अपना नही हो जाता, किस्मत की लकीरें भी चाहिए |

926. खुलते हैं मुझ पे राज कई इस जहान के, उसकी हसीन आँखों में जब झाँकता हूँ मैं।

927. एक लहर तेरे ख़्यालों की, मेरे वजूद को भिगो जाती हैं, एक बूंद तेरी याद की, मुझे इश़्क के दरिया में डुबो जाती हैं|

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928. कब उनकी आँखों से इज़हार होगा दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा गुज़र रही हे रात उनकी याद में कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा |

929. मेरी आँखों में झाँकने से पहले, जरा सोच लीजिये ऐ हुजूर जो हमने पलके झुका ली तो कयामत होगी, और हमने नजरें मिला ली तो मुहब्बत होगी।

930. फूल बिछा दूँ या आँखे बिछा दूँ, करूँ क्या ये समझ ना आये, कंही ये दिल मेरा तुम्हे देखकर, तुम्हारा बने,और मुझे भूल जाय |

931. जिन्दगी तो है पर कुछ खास नहीं, होठो पे उनका नाम तो है पर उन्हें एहसास नहीं, दिल में उनके लिए प्यार तो है पर उन्हें आभास नहीं, अपना बनाना चाहते हैं पर अब उन्हें अपना बनाने की उम्मीद भी हमारे पास नहीं।

932. फिर न कीजे मेरी गुस्ताख निगाहों का गिला, देखिये आपने फिर प्यार से देखा मुझको।

933. सुर्ख आँखो से जब वो देखती है, हम घबराकर आँखे झुका लेते है, क्यू मिलाए उन आँखो से आखे, सुना है वो आखो से अपना बना लेती है |

934. देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं |

935. सौ सौ उम्मीदें बंधती है, इक-इक निगाह पर, मुझको न ऐसे प्यार से देखा करे कोई।

936. नाराज मत हुआ करो कुछ अच्छा नहीं लगता है, तेरे हसीन चेहरे पर यह गुस्सा नहीं सजता है, हो जाती है कभी कभी गलती माफ कर दिया करो, हो जाती है कभी कभी गलती माफ कर दिया करो, चाहने वालों से बेदर्दी यह नुस्खा नहीं जंजता है |

937. दिल में छुपाया राज हर खोला नहीं जाता गर घाव दे कोई लफ्ज वो बोला नहीं जाता कुछ तो यकीन किजिए इन चाहतों पे भी अविश्वास पे हर रिश्ता कभी तोला नहीं जाता।

938. मैं उम्र भर जिनका न कोई दे सका जवाब, वह इक नजर में, इतने सवालात कर गये।

939. जब से समझा क्या हैं ये प्यार, करने लगे तबसे किसी का इंतज़ार, मांगने लगे उन्हें दुआओं में रब से, न जाने कब होगा उस चाँद का दीदार |

940. उल्फत का यह दस्तूर होता है, जिसे चाहो वही हमसे दूर होता है, दिल टूट कर बिखरता है इस क़द्र जैसे, कांच का खिलौना गिरके चूर-चूर होता है |

941. बस इक लतीफ तबस्सुम बस इक हसीन नजर, मरीजे-गम की हालत सुधर तो सकती है।

942. मेरी किसमत के हीरों का तुम इक ताज बन जाओ, कल की बात छोडो तुम मेरा आज बन जाओ, मै तो रोज करता हू मुहोब्बत डूब कर तुम से, मेरी इक बात मानो तुम मेरे हमराज़ बन जाओ |

943. अक्सर भूल भी जाता हूँ मैं तुझे, अक्सर भूल भी जाता हूँ मैं तुझे, फिर जिंदगी का फिकापन तेरी कमी का अहसास दिला देता है |

944. होता है राजे-इश्को-मुहब्बत इन्हीं से फाश, आंखें जुबाँ नहीं है मगर बेजुबाँ नहीं।

945. ख्वाइश तो यही है कि तेरे बाँहों में पनाह मिल जाये, शमा खामोश हो जाये और शाम ढल जाये, प्यार तू इतना करे कि इतिहास बन जाये, और तेरी बाँहों से हटने से पहले शाम हो जाये |

946. आंसुओं की बूँदें हैं या आँखों की नमी है न ऊपर आसमां है न नीचे ज़मी है यह कैसा मोड़ है ज़िन्दगी का उसी की ज़रूरत है और उसी की कमी है।

947. कोई दीवाना दौड़ के लिपट न जाये कहीं, आंखों में आंखें डालकर देखा न कीजिए।

948. जो एक बार दिल में बस जाये उसे हम निकाल नहीं सकते, जिसे दिल अपना बना ले उसे फिर कभी भुला नहीं सकते, वो जहाँ भी रहे ऐ खुदा हमेशा खुश रहे, उनके लिए कितना प्यार है हमें ये कभी हम जता नहीं सकते |

949. तक़दीर के आईने में मेरी तस्वीर खो गई; आज हमेशा के लिए मेरी रूह सो गई; मोहब्बत करके क्या पाया मैंने; वो कल मेरी थी आज किसी और की हो गई |

950. जो उनकी आँखों से बयां होते हैं, वो लफ्ज़ शायरी में कहाँ होते हैं।

951. सून पगली ये जो तुमसे इश्क़ बेपनाह है, यही मेरा गुनाह है, होंगे औरो के ख़ुदा लाखो लेकिन, मेरी तो बस एक तू ही मुमताज है |

952. ना मिलता गम तो बर्बादी के अफसाने कहाँ जाते, दुनिया अगर होती चमन तो वीराने कहाँ जाते, चलो अच्छा हुआ अपनों मैं कोई ग़ैर तो निकला, सभी अगर अपने होते तो बेगाने कहाँ जाते |

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953. पैगाम लिया है कभी पैगाम दिया है, आंखों ने मुहब्बत में बड़ा काम किया है।

954. तुम्हारी इस अदा पे क्या जवाब दूँ, अपने यार को क्या तोहफा दूँ, कोई अच्छा सा फूल होता तो मंगवाता, जो खुद गुलाब है उसको क्या गुलाब दूँ |

955. लोग अपना बना के छोड़ देते हैं, अपनों से रिशता तोड़ कर गैरों से जोड़ लेते हैं, हम तो एक फूल ना तोड़ सके, नाजाने लोग दिल कैसे तोड़ देते हैं |

956. नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं, हम घबरा कर आँखें झुका लेते हैं, कौन मिलाये उन आँखों से आँखें, सुना है वो आँखों से अपना बना लेते हैं।

957. प्यार कहो तो दो ढाई लफ्ज़, मानो तो बन्दगी , सोचो तो गहरा सागर, डूबो तो ज़िन्दगी , करो तो आसान , निभाओ तो मुश्किल , बिखरे तो सारा जहाँ ,और सिमटे तो तुम |

958. प्यार करके कोई जताए ये जरूरी तो नही, याद करके कोई बताये ये जरूरी तो नही, रोने वाला तो दिल में ही रो लेता है, आँख में आंसू आये ये जरूरी तो नही |

959. ज़ीना मुहाल कर रखा है मेरी इन आँखों ने, खुली हो तो तलाश तेरी बंद हो तो ख्वाब तेरे।

960. हम साँस लेते हैं तुम पे मरके, हम जीते हैं तुम्हारी इबादत करके, खो ना दे रहते हैं हमेशा डरते, हमे ना चाहिए इस दुनिया से कुछ भी, अब बस तुम ही हो रब से बढ़ के |

961. उन लोगों का क्या हुआ होगा. जिनको मेरी तरह गम ने मारा होगा. किनारे पर खड़े लोग क्या जाने. डूबने वाले ने किस किस को पुकारा होगा |

962. क्या कशिश थी उस की आँखों में मत पूछो. मुझ से मेरा दिल लड़ पड़ा मुझे यही चाहिये |

963. एक हसीन सा खाब हो तुम, गुज़रे कल की याद हो तुम, बहती नदी की धरा हो तुम, साहील में डूबी किस्ती का किनारा हो तुम |

964. रात को जब चाँद सितारे चमकते हैं, हम हरदम फिर तेरी याद में तड़पते हैं, आप तो चले गए हो छोड़कर हम को, मगर हम मिलने को तरसते है।

965. क़ैद ख़ानें हैं, बिन सलाख़ों के, कुछ यूँ चर्चें हैं , तुम्हारी आँखों के |

966. सब कुछ मिला सुकून की दौलत न मिली, एक तुझको भूल जाने की मोहलत न मिली, करने को बहुत काम थे अपने लिए मगर, हमको तेरे ख्याल से कभी फुरसत न मिली |

967. अब ये न पूछना की ये अल्फ़ाज़ कहाँ से लाता हूँ , कुछ चुराता हूँ दर्द दूसरों के , कुछ अपना हाल सुनाता हूँ |

968. मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ. एक जंगल है तेरी आँखों में मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ |

969. सुबह का नजारा भी क्या खूब है, फिर क्यों मुझसे दूर मेरा महबूब है, हमें आती है पल पल आपकी याद, ये आपकी निगाहों का कुसूर है |

970. तू मेरा सपना, मेरा अरमान है पर शायद तू अपनी अहमियत से अंजान है, मुझसे कभी भी रूठ मत जाना आप, क्यूंकि मेरी दुनिया आप के बिना वेरान है |

971. झील अच्छा, कँवल अच्छा के जाम अच्छा है, तेरी आँखों के लिए कौन सा नाम अच्छा है |

972. रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात इस पे मैं मरती रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करती रहू|

973. बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है, यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है । तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है । अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ, मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।

974. तुम्हारी याद में आँखों का रतजगा है, कोई ख़्वाब नया आए तो कैसे आए |

975. रब से आपकी खुशीयां मांगते है, दुआओं में आपकी हंसी मांगते है, सोचते है आपसे क्या मांगे, चलो आपसे उम्र भर की मोहब्बत मांगते है |

976. यूँ तो इस दर्द की इन्तहा कुछ नहीँ, गिला ये है कि जाते हुए कहा कुछ नहीँ, ताकते रहे बस जाने से पहले वो, लब कुछ तो कह रहे थे, क्यों सुना कुछ नहीँ |

977. यूँ ही गुजर जाती है शाम अंजुमन में, कुछ तेरी आँखों के बहाने कुछ तेरी बातो के बहाने |

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978. दिल की किताब में गुलाब उनका था, रात की नींद में ख्वाब उनका था, कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा, मर जायंगे तुम्हारे बिना ये जबाब उनका था |

979. खरीद सकते उन्हें तो अपनी जिंदगी देकर भी खरीद लेते , पर कुछ लोग “कीमत” से नही “किस्मत” से मिला करते हैं ।

980. ये आईने नही दे सकते तुम्हे तुम्हारी खूबसूरती की सच्ची ख़बर, कभी मेरी इन आँखों में झांक कर देखो की कितनी हसीन हो |

981. बरसात भी नहीं है बादल गरज रहे हैं, सुलझी हुई लटे हैं और हम उलझ रहे हैं, मदमस्त एक भँवरा क्या चाहता कली से, तुम भी समझ रहे हो हम भी समझ रहे हैं |

982. झूठ बोलते है वो जो कहते हैं, हम सब मिट्टी से बने हैं मैं कईं अपनों से वाक़िफ़ हूँ जो पत्थर के बने हैं |

983. मुझसे जब भी मिलो नजरें उठाकर मिलो, मुझे पसंद है अपनेआप को तुम्हारी आँखों में देखना |

984. मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो, मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो, दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात, मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो |

985. हम भी फूलों की तरह कितने बेबस हैं , कभी किस्मत से टूट जाते हैं , कभी लोग तोड़ जाते हैं |

986. साकी पिला रहा है और मैं पिए जा रहा हूँ, हर सांस पर बस नाम तेरा लिए जा रहा हूँ , ख्वाइश तो मरने की है फिर भी जिए जा रहा हूँ, जो आगाज़ तुम ने किया था मेरी बर्बादिओं का मैं उन्हें अंजाम दिए जा रहा हूँ |

987. तेरे होंठो की लाली आज मुझे बहका रही हैं तेरे बदन की खुशबू मुझे महका रही हैं मेरी जान तुझे वैलेंटाइन्स डे मुबारक हो, आजा करीब तुझे छूने को बेचेनी बढ़ रही है |

988. वो बेवफा नहीं है , हमको यकीन है बस इम्तहान लेने का खुदा शौकीन है न आने का सबब महज मजबूरियाँ रही होंगी वरना दोस्ती के कितने ही उनके लम्हे हसीन हैं |

989. मुलाक़ातें तो आज भी हो जाती है तुमसे ख़्वाब किसी “ताले” के मोहताज नही हैं तेरी आँखों से यून तो सागर भी पिए हैं मैने तुझे क्या खबर जुदाई के दिन कैसे जिए हैं मैने |

990. मोहब्बत में न जाने कैसी ये अनहोनी हो गयी पता ही नहीं चला कब किस से मोहब्बत हो गयी उन्होंने मेरे करीब आकर मुझे सीने से लगाया मौसम हसीं होते ही बिन मौसम बरसात हो गयी |

991. ज़िंदगी में कभी प्यार करने का मन हो तो, अपने दुखों से प्यार करना क्योंकि, दुनिया का दस्तूर है दुनिया का दस्तूर है |

992. अब ना बातो की जरुरत हैं, निगाहो से अब सारी बात कीजिये बड़ा उजाला हैं आपके नूर से, जुल्फे खोल के अब रात कीजिये बड़ी मुद्दत से इंतजार में हूँ, आपके सिरहाने नींद के लिए अपनी बाहों का सहारा दे के. मुझे ये हसीन खवाब दीजिये |

993. मोहब्बत के रास्ते कितने भी मखमली क्यो न हो, खत्म तन्हाई के कम्मबल मे ही होते है |

994. ठोकर ना लगा मुझे पत्थर नही हूँ मैं, हैरत से ना देख कोई मंज़र नही हूँ मैं, उनकी नज़र में मेरी कदर कुछ भी नही, मगर उनसे पूछो जिन्हें हासिल नही हूँ मैं|

995. तलाश हे एक ऐसे सख्स की, जो आँखों में उस वक्त दर्द देख ले जब दुनिया हमसे कहती हे क्या यार तुम मुस्कुराते बहुत हो |

996. मेरे होटों से तेरे होंठों को गीला कर दू तेरे होंटो को मैं और भी रसीला कर दू तू इस कदर प्यार करे के प्यार की इन्तहा हो जाए, तेरे होंठों को चूस कर तुझे और जोशीला कर दू |

997. कितनी आसानी से कह दिया तुमने, की बस अब तुम मुझे भूल जाओ, साफ साफ लफ्जो मे कह दिया होता, की बहुत जी लिये अब तुम मर जाओ |

998. मुझे ढूंढने की कोशिश अब न किया कर, तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली |

999. मुझे तलाश है एक रुह की जो मुझे दिल से प्यार करे. वरना इंसान तो पैसों से भी मिल जाया करते हैं |

1000. उसके चेहरे पर इस क़दर नूर था, कि उसकी याद में रोना भी मंज़ूर था, बेवफा भी नहीं कह सकते उसको ज़ालिम, प्यार तो हमने किया है वो तो बेक़सूर था।