Shayari: 10,000+ Best Hindi Shayari Collection of 2019

201. याद आता है अक्सर वो गुजरा ज़माना, तेरी मीठी सी आवाज में भैया कहकर बुलाना, वो स्कूल के लिए सुबह मुझको जगाना, आई है राखी लेकर दीदी, यही है भाई-बहन के प्यार का तराना।

202. मुकाम वो चाहिए की जिस दिन भी हारु , उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेंरे चर्चे हो |

203. प्यार भी बहोत अजीब चीज़ स रोण त पहला सोंण भी ना दैवे।

204. रिश्ता हैं जन्मो का हमारा, भरोसे का और प्यार भरा! चलो इसे बांधे भैया, राखी के अटूट बंधन में!! रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामना |

205. रोज ढलता हुआ सूरज कहता है मुझसे, आज उसको बेवफा हुए एक दिन और बीत गया ।

206. अगर गुस्सा करेगी तो भी धोरे आयूंगा तेरे तेर बिना रहण की आदत कोणी मन्नै।

207. आसमान पर सितारे है जितने, उतनी जिंदगी हो तेरी, किसी की नज़र न लगे, दुनिया की हर ख़ुशी हो तेरी, रक्षाबंधन के दिन भगवान से बस यह दुआ है, मेरी! रक्षा बंधन का हार्दिक अभिनन्दन!

208. फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ “इश्क” मुकम्मल, इंसानों को तो हमने सिर्फ बर्बाद होते देखा है !!

209. दिल से देता हूँ मैं दुआ तुझको, कभी न हो दुःख की भावना मन में, उदासी छू न पाए कभी भी तुझको, खुशियों की चाँदनी छा जाये जीवन में।

210. सिखा मुझसे ही मेरी मोहब्बत ने मोहब्बत करने का हुन्नर ! आज मेरी मोहब्बत गैरों से मोहब्बत रचा बैठी !!

211. तू आ च ना आ पर तेरी याद तो नुए आवेगी।

212. अब हर भाई के हाथ पे होगा रंग-बिरंगे रेशम का तार, भाई बहन का प्यार बढ़ाने आया राखी का त्यौहार। हैप्पी राखी।

213. हमें तो कबसे पता था की तू बेवफ़ा है ! तुझे चाहा इसलिए कि शायद तेरी फितरत बदल जाये !!

214. मन्ने सिर्फ दो चीज़ां त डर लाग्या करै एक तेरा रोंण त दूसरा तन्ने खोंण त।

215. कभी हमसे लड़ती है, कभी हमसे झगड़ती है, लेकिन बिना कहे हमारी हर बात को समझने का हुनर भी बहन ही रखती है।

216. लफ्ज़ वही हैं, माईने बदल गये हैं ! किरदार वही, अफ़साने बदल गये हैं ! उलझी ज़िन्दगी को सुलझाते सुलझाते ! ज़िन्दगी जीने के बहाने बदल गये हैं !!

217. वो मेरी ना होइ तो कै होग्या मैं तो उसका ए हूँ।

218. राखी कर देती है, सारे गिले-शिकवे दूर इतनी ताकतवर होती है कच्चे धागों की पावन डोर

219. तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी ! वरना हमको कहां तुम से शिकायत होगी ! ये तो बेवफ़ा लोगों की दुनिया है ! तुम अगर भूल भी जाओ जो रिवायत होगी !!

220. ओरे ए ढाल का अकेलापन है मेरा तेरी चाहत भी कोणी अर तेरी ज़रूरत भी सै।

221. याद है हमारा वो बचपन , वो लड़ना – झगड़ना और वो मना लेना , यही होता है भाई – बहन का प्यार , और इसी प्यार को बढ़ाने के लिए आ रहा है रक्षा बंधन का त्यौहार।

222. किसी को इतना भी न चाहो कि भुला न सको क्योंकि ! ज़िंदगी_इन्सान_और_मोहब्बत_तीनों_बेवफा‬ हैं !!

223. किसे नै मेर त पूछा के तन्ने उसकी याद आया करे। मै भी हास के बोल्या जबे तो ज़िंदा सूं मै।

224. ये लम्हा कुछ ख़ास है , बहन के हाथों में भाई का हाथ है , ओ ! बहना तेरे लिए मेरे पास कुछ ख़ास है , तेरे सकून की खातिर मेरी बहना , तेरा भाई हमेशा तेरे साथ है।

225. आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए ! महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए ! करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो ! पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए |

226. बैरण तू के जाने प्यार मेरा तेरे खातर तो मने मेरे बाबू के गुट भी खाये ओढे सै।

227. आया राखी का त्यौहार , छाई खुशियों की बहार , एक रेशम की डोरी से बाँधा , एक बहन ने अपने भाई की कलाई पर प्यार।

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228. तू भी बेवफा निकला औरों की तरह, सोचा था ! की हम तुझसे ज़माने की बेवफाई का गिला करेंगे |

229. नेचर का हर रंग आप पे बरसे हर कोई आपसे होली खेलने को तरसे रंग दे आपको मिल के सारे इतना की आप वो रंग उतारने को तरसे होली की हार्दिक शुभकामनाएं |

230. फूलों का तारों का सब का कहना है। . एक हज़ारों में मेरे भईया हैं लव यू अलॉट |

231. जुल्मो सितम सहते रहे एक बेवफा की आस मे ! डुबो दिया मुझे दरिया ने दो घूट की प्यास में |

232. हात है जिसका हमारे उपर ये तेवर भी उसका वरदान है। शानसे जिना सिखाया जिसने महादेव उनका नाम है|

233. साथ पले और साथ बढ़े हैं , खूब मिला बचपन में प्यार।, भाई बहन का प्यार बढ़ाने आया ये त्यौहार |

234. मैंने उस से वफ़ा की उम्मीद लगा रखी थी दोस्तों ! जिसके चर्चे आम थे बाजार में बेवफाई के दोस्तों |

235. शिवराय का नारा लगा के!! दुनिया मै हम छा गये!! दुश्मन भी छुपकर बोले वो देखो!! शिवराय के शिवभक्त आ गये |

236. चन्दन की डोरी ,फूलों का हार , आया सावन का महीना और राखी का त्यौहार , जिसमें झलकता है भाई – बहन का प्यार |

237. इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है ! खामोशियो की आदत हो गयी है ! न सीकवा रहा न शिकायत किसी से अगर है तो ! एक मोहब्बत जो इन तन्हाइयों से हो गई है |

238. तने भी मरते प्यार कोनियाउसने भी मरते प्यार कोनियाम्हारी जिंदगी तो इसी होरी हैज़ुकर भैंस की खोर मे न्यार कोनिया |

239. बहन चाहे सिर्फ प्यार – दुलार, नहीं माँगती बड़े उपहार , रिश्ता बने रहे सदियों तक , मिले भाई को खुशियां हज़ार|

240. ये बेवफा, वफा की कीमत क्या जाने ! ये बेवफा गम-ए-मोहब्बत क्या जाने ! जिन्हे मिलता है हर मोड पर नया हमसफर ! वो भला प्यार की कीमत क्या जाने |

241. कसुती मासुम थी वाजिसकॆ स्यामी बॆठ लिखना सीखा थाबडी अजीब थी उसकी हास्सीजिसके स्यामी हर पकवान फीका थाफेर तन्हा करग्यी जो थामा था उसने मेरा हाथबहोत दुर चली ग्यी छोड क मन्नॆ मेरी कलम के साथ ।

242. सूरज की तरह चमकते रहो , फूलों की तरह महकते रहो, यही दुआ है इस बहन की आज कि आप सदा खुश रहो। बहन की तरफ से भाई को राखी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

243. मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला, अब शहर का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता।

244. इतणा बुरा तो पहले करया ढोंग क्युज म तेरा ए सुं तो इब मॊन क्युज म तेरा नही तो मेरी निन्दा क्युज तु मेरी नहीं तो म जिन्दा क्यु |

245. रिश्ता हम भाई बहन का , कभी खट्टा कभी मीठा , कभी रूठना कभी मनाना , कभी दोस्ती कभी झगड़ा , कभी रोना और कभी हसाना , ये रिश्ता है प्यार का , सबसे अलग सबसे अनोखा |

246. बंद कर देना खुली आँखों को मेरी आ के तुम, अक्स तेरा देख कर कह दे न कोई बेवफा।

247. आज भी बैठ्या हुँ उस्से जगहा जित तेरी जुल्फां की छाँ तै मेरी साँस थम जाया करतीउस्से सवाल का जवाब ढूंढते ढूंढते जो कद्दे मेरी आँख्या मै बस्या करते |

248. राखी का त्यौहार था राखी बंधवाने को भाई भी तैयार था भाई बोल बहना मेरी अब तो राखी बाँध दो , बहना बोली “कलाई पीछे करो , पहले रुपये हज़ार दो “ |

249. सिर्फ एक ही बात सीखी इन हुस्न वालों से हमने, हसीन जिसकी जितनी अदा है वो उतना ही बेवफा है।

250. तेरी अक्टिवा जावे साइलेंट मोड पेमेरी बुलेट छोड़े पटाखे हर रोड पेहथियार इतने हैँ के छोरी तन्ने तोल दूँ औरमेरे यार इतने हैँ के तेरे पूरे शहर ने फोड़ दूँ |

251. गलियाँ फूलों से सज़ा रखी हैं , हर मोड़ पर लड़कियाँ बिठा रखी हैं पता नहीं तुम कहाँ से आ जाओ इसलिए सबके हाथ में राखी थमा रखी है |

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252. रोये कुछ इस तरह से मेरे जिस्म से लग के वो, ऐसा लगा कि जैसे कभी बेवफा न थे वो।

253. हम आज भी उसका इंतज़ार करा सा,हम आज भी उसने इतना प्यार करा सा,एक बार प्यार ते बोल के तो देखे,हम आज भी उस पे जान निसार करा सा |

254. उसका हुसन गया कलेजा चीर , नयनों से छूटा एक तीर , वो मुस्कराई , नज़दीक आई , और बोली ” राखी बन्धवाले मेरे वीर “ |

255. इलाही क्यूँ नहीं उठती क़यामत माजरा क्या है, हमारे सामने पहलू में वो दुश्मन के बैठे हैं।

256. दिल का दर्द ना छुपा सके हम, यो गम किसे ने बता भी ना सके हम, क्यू कर सहे इश्स दर्द ने हम, महरि मजबूरी से किसे ते यो दर्द दिखा भी नही सकते हम |

257. हर लड़की को आपका इंतज़ार है हर लड़की आपके लिए बेकरार है , हर लड़की को आपकी आरज़ू है , दोस्त ! ये आपका कमाल नहीं , कुछ दिन बाद राखी का त्यौहार है।

258. रहने दे ये किताब तेरे काम की नहीं, इस में लिखे हुए हैं वफाओं के तज़करे।

259. तन्नै अपणी तो मै बणाऊगाघर के मानगे , तो ठीक नी ठा ल्याउगातु कहै दिये अपणे भाई नैरोक कै दिखा दियो तेरे बाप के ‪‎जमाई‬ नै‬ |‬

260. अगले बरसों कि तरह होंगे करीने तेरे, किसे मालुम नहीं बारह महीने तेरे।

261. अनजान एक साथी का इस दिल को इंतजार हैं, बहुत प्यासी हैं ये आँखें और दिल बेकरार हैं उनके साथ मिल जाए तो हर राह आसान हो जाएगी शायद इसी अनोखे एहसास का नाम प्यार हैं |

262. एक वो टेम था जब बात खत्म ना होया करतीएक यो टेम है के तेरे तै बात ए ना होती |

263. इतनी मुश्किल भी ना थी राह मेरी मोहब्बत की, कुछ ज़माना खिलाफ हुआ कुछ वो बेवफा हो गए।

264. जब किसी के सपने किसी के अरमान बन जाये जब किसी की हसी किसी की मुस्कान बन जाए उसे सिर्फ और सिर्फ प्यार कहा करते हैं जब किसी की साँसे किसी की जान बन जाए |

265. हुँने की ए ते प्यार कोनी. की ए ने हम ते प्यार कोनी म्हरी जिंदगी तो इसीई होगी जानू भैसा की खोर मै न्यार कोनी |

266. मेरी वफा के क़ाबिल नही हो तुम, प्यार मिले ऐसे इन्सान नही हो तुम, दिल क्या तुम पर ऐतबार करेगा, प्यार मे धोखा दिया ऐसे बेवफा हो तुम।

267. कभी अलफ़ाज़ तोह कभी खयाल भूल जाऊ तुझे इस कदर चाहू के अपनी सांस भूल जाऊ उठ कर तेरे पास से जो मैं चल दू , तो जाते हुए खुद को तेरे पास भूल जाऊ |

268. कर कर कै बहाने रोवैगी जब याद तन्नै मेरी आवैगीफोटो धर कै सिराहणै सोवैगी जब याद तन्नै मेरी आवैगी |

269. नजर नजर से मिलेगी तो सर झुका लेगा, वह बेवफा है मेरा इम्तिहान क्या लेगा, उसे चिराग जलाने को मत कह देना, वह नासमझ है कहीं उंगलियां जला लेगा।

270. साथ अगर दोगे तो मुस्कुरायेंगे जरूर प्यार अगर दिल से करोगे तो निभाएंगे जरूर राह में कितने भी कांटे क्यों ना हो आवाज़ अगर दिल से दोगे तो आएंगे जरूर |

271. सुबह शाम तरी घनी याद आवे से,सारी रात मानने जागवे से,करने को कर लू कॉल तनने,पेर कस्टमर केर की वा चोरी बार बार बॅलेन्स लो बटावे से!

272. जब तक न लगे एक बेवफाई की ठोकर, हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है।

273. दो बातें उनसे की तो दिल का दर्द खो गया लोगो ने हमसे पूछा आज तुम्हे क्या हो गया हम बेकरार आँखों से सिर्फ हंस पाए ये भी ना कह पाए की हमे प्यार हो गया |

274. ख़ाक से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती छोटी मोटी बात पे हिज़रत नहीं होती, पहले दीप जलें तो चर्चे होते थे और अब शहर जलें तो हैरत नहीं होती |

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275. बेवफाओं की इस दुनियां में संभलकर चलना, यहाँ मुहब्बत से भी बर्बाद कर देते हैं लोग।

276. उनका हर अंदाज़ हकीकत है या ख्वाब है , खुशनसीबों के पास रहते हैं वो , मेरे पास तो बस उनकी मीठी सी याद है |

277. सच की हालत किसी तवायफ सी है, तलबगार बहुत हैं तरफदार कोई नही |

278. किसी का रूठ जाना और अचानक बेवफा होना, मोहब्बत में यही लम्हा क़यामत की निशानी है।

279. तेरी अदाओं का जादू इस शेर में लिखता हूँ तेरी अदाओं का जादू इस शेर में लिखता हूँ मदहोश हूँ अभी थोड़ी देर में लिखता हूँ |

280. इलाज ए इश्क पुछा जो मैने हकीम से धीरे से सर्द लहजे मे वो बोला जहर पिया करो सुबह दोपहर शाम |

281. उसकी बेवफाई पे भी फ़िदा होती है जान अपनी, अगर उस में वफ़ा होती तो क्या होता खुदा जाने।

282. तुमसे मिलकर जाने किस गुमान में हूँ मैं तुमसे मिलकर जाने किस गुमान में हूँ मैं देखो भूल गया सब पते-ठिकाने आसमान में हूँ मैं |

283. दुनिया में सब चीज़ मिल जाती है, केवल अपनी ग़लती नहीं मिलती |

284. वो सुना रहे थे अपनी वफाओ के किस्से, हम पर नज़र पड़ी तो खामोश हो गए।

285. मेरी आँखों से आसूँ भले ही ना निकले हो पर ये दिल आज भी तेरे लिए रोता है लाखों दिल भी मिल कर उतना प्यार नहीं कर सकते जितना ये अकेला दिल तुमसे करता है |

286. जो अंधेरे की तरह डसते रहे ,अब उजाले की कसम खाने लगे चंद मुर्दे बैठकर श्मशान में ,ज़िंदगी का अर्थ समझाने लगे |

287. चाहते हैं वो हर रोज़ नया चाहने वाला. ऐ खुदा मुझे रोज़ इक नई सूरत दे दे।

288. शौंक नहीं है मुझे अपने जज़्बातों को यूँ सरेआम लिखने का मगर क्या करूँ , अब जरिया ही ये है तुझसे बात करने का |

289. हलकी हलकी सी सर्द हवा ,जरा जरा सा दर्द ए दिल अंदाज अच्छा है ए नवम्बर तेरे आने का |

290. दिल भी गुस्ताख हो चला था बहुत, शुक्र है की यार ही बेवफा निकला।

291. सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा , सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा , जाने क्या बात थी उसमें और मुझ में ,सारी महफ़िल भूल गए बस वही एक चेहरा याद रहा |

292. मोहब्बत हमने सीखी है चराग़ों की शमाओं से कभी तो रात आएगी कभी तो लौ जलाओगे |

293. न कोई मज़बूरी है न तो लाचारी है, बेवफाई उसकी पैदायशी बीमारी है।

294. साथ ना रहने से रिश्ते टूटा नहीं करते , वक़्त की धुंध से लम्हे टूटा नहीं करते , लोग कहते हैं कि मेरा सपना टूट गया, टूटी नींद है , सपने टूटा नहीं करते |

295. पहचान कहाँ हो पाती है, अब इंसानों की, अब तो गाड़ी, कपडे लोगों की, औकात तय करते हैं |

296. तुझे है मशक-ए-सितम का मलाल वैसे ही, हमारी जान थी, जान पर वबाल वैसे ही।

297. जो तू साथ न छोड़े ता-उम्र मेरा ए मेहबूब मौत के फ़रिश्ते को भी इनकार न कर दूं तो कहना इतनी कशिश है मेरी मुहब्बत की तासीर में दूर हो के भी तुझ पे असर न कर दूं तो कहना !

298. आख़िर तुम भी उस आइने की तरह ही निकले जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए |

299. चला था ज़िकर ज़माने की बेवफाई का, सो आ गया है तुम्हारा ख्याल वैसे ही।

300. मेरी नजरों की तरफ देख जमानें पे न जा , इक नजर फेर ले, जीने की इजाजत दे दे, रुठ ने वाले वो पहली सी मोहब्बत दे दे , इश्क मासुम है, इल्जाम लगाने पे न जा |

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