Shayari: 10,000+ Best Hindi Shayari Collection of 2019

701. अब तो अपनी तबियत भी जुदा लगती है, सांस लेता हूँ तो ज़ख्मों को हवा लगती है, कभी राजी तो कभी मुझसे खफा लगती है, जिंदगी तू ही बता तू मेरी क्या लगती है।

702. ख़र्च जितना भी करूँ, बढ़ती जाती है ये यादें तेरी अजीब दौलत है !

703. मेरी आंखे ढूंढे कन्हा चारों ओर कहाँ छुप गया रे मेरा माखनचोर कन्हैया उड़ गया ऐसे जैसे पुरवैया क्या करेगी अब प्यारी यशोदा मैया |

704. फुर्सत मिले जब भी तो रंजिशे भुला देना, कौन जाने साँसों की मोहलतें कहाँ तक हैं।

705. इतनी यादें तेरी पर तू ही मेरे पास नहीं इतनी बातें है पर करने को तू ही साथ नहीं |

706. सांवरिया बंसीवाला है तू नंदलाला तू है रंगीला, छेल-छबीला, मुरली बजैया तू है अलबेला, मनमोहन, मतवाला तेरी दीवानी हर इक ब्रिज बाला. कृष्णा तेरी जय हो |

707. ज़िन्दगी एक हसीन ख़्वाब है, जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिये, ग़म खुद ही ख़ुशी में बदल जायेंगे, सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिये।

708. इस दुनियाँ में सब कुछ बिकता है, फिर जुदाई ही रिश्वत क्युँ नही लेती? मरता नहीं है कोई किसी से जुदा होकर, बस यादें ही हैं जो जीने नहीं देती |

709. कोरे कागज पर हमने अपनी कहानी लिख दी, मिला जाे दुनिया से हमें, उससे हमने शायरी लिख दी, फिर क्यों अाखों के आसुओं में तेरी कमी है दिखती, अाैर मेरे जिंदगी की किताब पर तेरे एहसास की निशानी दिखती |

710. हो के मायूस न यूं शाम से ढलते रहिये, ज़िन्दगी भोर है सूरज सा निकलते रहिये, एक ही पाँव पे ठहरोगे तो थक जाओगे, धीरे-धीरे ही सही राह पे चलते रहिये।

711. क्या खूब होता अगर यादें रेत होती मुठी से गिरा देते, पाँव से उड़ा देते |

712. कहाँ वो नई गहिरायाँ हसने -हँसाने में, मिलेंगी जो किसी के साथ दो आंसू बहने में , तुम आये तो खुशी आई लेकिन हंसु अभी केसे , कुछ देर तो लगती है रो कर मुस्कराने में |

713. चलो बिखरने देते है जिंदगी को अब, सँभालने की भी तो एक हद होती है।

714. जीना चाहते हैं ज़िन्दगी रास नहीं आती मरना चाहते हैं मौत पास नहीं आती बहुत उदास हैं हम इस ज़िन्दगी से उनकी यादें तो तड़पाने से बाज़ नहीं आती |

715. ना जाने क्यूँ नज़र लगी ज़माने की, अब वजह मिलती नहीं मुस्कुराने की, तुम्हारा गुस्सा होना तो जायज़ था, हमारी आदत छूट गयी मनाने की |

716. थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी, मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे।

717. यूँ ही गुजर जाते हैं मीठे लम्हे किसी मुसाफिर की तरह .. और यादें वहीँ खड़ी रह जाती हैं रुके रास्तों की तरह |

718. तक़दीर के आईने में मेरी तस्वीर खो गई, आज हमेशा के लिए मेरी रूह सो गई, मोहब्बत करके क्या पाया मैंने, वो कल मेरी थी आज किसी और की हो गई |

719. जन्नत-ए-इश्क में हर बात अजीब होती है, किसी को आशिकी तो किसी को शायरी नसीब होती है।

720. जहन में हर शाम यादें तुम्हारी आ बैठती हैं ऐसे किसी दीवार पर दोपहर की धूप चढ़ी हो जैसे |

721. उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो, जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो, इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है, इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो |

722. रोज साहिल से समंदर का नजारा न करो, अपनी सूरत को शबो-रोज निहारा न करो, आओ देखो मेरी नजरों में उतर कर खुद को, आइना हूँ मैं तेरा मुझसे किनारा न करो।

723. कुछ जख्म कुछ दर्द कुछ यादें ” कुछ अधुरे ख्वाब ” कुछ झूठे वादे ! शुक्रिया मोहब्बत तेरा ” तुमने खाली हाथ नही भेजा अपने दर से |

724. ज़िंदगी है बड़ी नादान इसलिए चुप हूँ, दर्द ही दर्द सुबह शाम इसलिए चुप हूँ, कहो तो कह दूं ज़माने से दास्तान अपनी, उसमे आएगा तुम्हारा नाम इसलिए चुप हूँ |

725. बहुत सोचा बहुत समझा बहुत ही देर तक परखा, कि तन्हा हो के जी लेना मोहब्बत से तो बेहतर है।

726. मेरे दिल की सिम्त न देख तू,। किसी और का ये मुक़ाम है, यहाँ उसकी यादें मुक़ीम हैं, ये किसी को मैने दिया नही|

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727. वो कह कर गया था मैं लौटकर आउंगा, मैं इंतजार ना करता तो क्या करता, वो झूठ भी बोल रहा था बड़े सलीके से, मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता |

728. कहने लगी है अब तो मेरी तन्हाई भी मुझसे, मुझसे कर लो मोहब्बत मैं तो बेवफा भी नहीं।

729. प्यार का रिश्ता भी कितना अजीब होता है.. मिल जाये तो बातें लंबी और बिछड़ जायें तो यादें लंबी |

730. कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते, हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते, अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा, बयां करते तो महफ़िल को रुला देते |

731. एहतियातन देखता चल अपने साए की तरफ, इस तरह शायद तुझे एहसास-ए-तन्हाई न हो।

732. रूबरू मिलने का मौका मिलता नहीं है रोज, इसलिए लफ्ज़ों से तुमको छू लिया मैंने।

733. उड़ता हुआ गुबार सर-ए-राह देख कर, अंजाम हमने इश्क़ का सोचा तो रो दिए, बादल फिजा में आप की तस्वीर बन गए, साया कोई ख्याल से गुजरा तो रो दिए।

734. कुदरत के इन हसीन नजारों का हम क्या करें, तुम साथ नहीं तो इन चाँद सितारों का क्या करें।

735. टपकती है निगाहों से बरसती है अदाओं से, मोहब्बत कौन कहता है कि पहचानी नहीं जाती।

736. हम रूठे तो किसके भरोसे, कौन आएगा हमें मनाने के लिए, हो सकता है, तरस आ भी जाए आपको, पर दिल कहाँ से लाये आप से रूठ जाने के लिए |

737. कितना भी दुनिया के लिए हँस के जी लें हम, रुला देती है फिर भी किसी की कमी कभी-कभी।

738. मोहब्बत नाम है जिसका वो ऐसी क़ैद है यारों, कि उम्रें बीत जाती हैं सजा पूरी नहीं होती।

739. प्यार कोई दीया नहीं,जब चाहा जला दिया बुझा दिया, ये बालू का महल नहीं,जब चाहा बना लिया मिटा दिया, ये रस है जो दिल की गहराइयों से लिकलता है, ये बच्चों का खेल नहीं,जिसे चाहा हरा दिया जिता दिया |

740. कभी सोचा न था तन्हाइयों का दर्द यूँ होगा, मेरे दुश्मन ही मेरा हाल मुझसे पूछते हैं।

741. संभाले नहीं संभलता है दिल, मोहब्बत की तपिश से न जला, इश्क तलबगार है तेरा चला आ, अब ज़माने का बहाना न बना।

742. मेरे अस्कों से भीगी हैं, जाने कितनी तस्वीर तुम्हारी, तुम झलक दिखाकर चली गयी, और बदल गयी तकदीर हमारी |

743. देख कर चेहरा पलट देते हैं अब वो आइना, मौसम-ए-फुरकत उन्हें सूरत कोई भाती नहीं।

744. यही बहुत है कि तुमने पलट के देख लिया, ये लुत्फ़ भी मेरी उम्मीद से कुछ ज्यादा है।

745. सिर्फ मोहब्बत को पाना ही मोहब्बत नहीं होती, कभी तुम भी कर लेते ऐतबार तो ये दुरी न होती, माफ़ कर देना गलतियों को मेरे, तुम्हे चोट पोहचे ऐसी कभी मेरी तमन्ना नहीं होती |

746. क्या करेंगे महफिलों में हम बता, मेरा दिल रहता है काफिलों में अकेला।

747. राज़ खोल देते हैं नाजुक से इशारे अक्सर, कितनी खामोश मोहब्बत की जुबान होती है।

748. दुनिया में तेरे इश्क़ का चर्चा ना करेंगे, मर जायेंगे लेकिन तुझे रुस्वा ना करेंगे, गुस्ताख़ निगाहों से अगर तुमको गिला है, हम दूर से भी अब तुम्हें देखा ना करेंगे।

749. तन्हाई रही साथ ता-जिंदगी मेरे, शिकवा नहीं कि कोई साथ न रहा।

750. आ जाओ किसी रोज़ तुम तो तुम्हारी रूह मे उतर जाऊँ ! साथ रहूँ मैं तुम्हारे ना किसी और को नज़र आऊँ ! चाहकर भी मुझे कोई छू ना सके मुझे कोई इस तरह ! तुम कहो तो यूं तुम्हारी बाहों में बिखर जाऊँ |

751. उसके इंतजार के मारे है हम, बस उसकी यादों के सहारे है हम, दुनियाँ जीत के कहना क्या है अब, जिसे दुनियाँ से जीतना था आज उसी से हारे है हम |

752. उसे पाना उसे खोना उसी के हिज्र में रोना, यही गर इश्क है तो हम तन्हा ही अच्छे हैं।

753. इश्क ओर दोस्ती मेरे दो जहान है, इश्क मेरी रुह, तो दोस्ती मेरा ईमान है, इश्क पर तो फिदा करदु अपनी पुरी जिंदगी, पर दोस्ती पर, मेरा इश्क भी कुर्बान है |

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754. हसरत थी सच्चा प्यार पाने की, मगर चल पडी आँधियां जमाने की, मेरा गम कोई ना समझ पाया, क्युँकी मेरी आदत थी सबको हसाने की |

755. ख्वाब बोये थे और अकेलापन काटा है, इस मोहब्बत में यारों बहुत घाटा है।

756. प्यार की जंग में जो खुद ही हार जाते हैं वही तो जिंदगी में अपना प्यार पाते हैं। दुनिया कहती रहे बातें इधर -उधर की मुहब्बत को पाकर वह खुद मुस्कराते हैं।

757. जख्म जब मेरे सीने से बहार आयेंगे, आंसू भी मोती बनकर बिखर जायेंगे, ये न पूछों कि किसने कितना दर्द दिया है, वर्ना कई अपनो के चेहरे उतर जायेंगे |

758. कितनी फ़िक्र है कुदरत को मेरी तन्हाई की, जागते रहते हैं रात भर सितारे मेरे लिए।

759. बस तेरे नाम से मेरा नाम जुडा रहे । इससे नहीं फर्क बेवफाई या वफा करे । कुछ तो हो तेरे नाम का पास मेरे । तेरे गम से ही बेशक मेरा दिल भरा रहे ।

760. कभी तुम पूछ लिया करना कभी हम भी ज़िक्र कर लिया करेंगे.. छुपाकर दिल के दर्द को.. एक दूसरे की फ़िक्र कर लिया करेंगे |

761. मेरी तन्हाइयां करती हैं जिन्हें याद सदा, उन को भी मेरी ज़रुरत हो ज़रूरी तो नहीं।

762. सारे शहर को इस बात की खबर हो गयी, क्यो ना सजा दे इस कमबख्त दिल को, दोस्ती का इरादा था और महोब्बत हो गयी |

763. कोई रास्ता नही दुआ के सिवा, कोई सुनता नही खुदा के सिवा, मैने भी ज़िंदगी को करीब से देखा है मेरे दोस्त, मुस्किल मे कोई साथ नही देता आँसू के सिवा |

764. वो जोश-ए-तन्हाई शब-ए-ग़म, वो हर तरफ बेकसी का आलम, कटी है आँखों में रात सारी, तड़प तड़प कर सहर हुयी।

765. खुदा की रहमत में अर्जियाँ नहीं चलतीं, दिलों के खेल में खुदगर्जियाँ नहीं चलतीं, चल ही पड़े हैं तो ये जान लीजिए हुजुर, इश्क़ की राह में मनमर्जियाँ नहीं चलतीं |

766. वो रूठे इस कदर की मनाया ना गया, दूर इतने हो गए कि पास बुलाया ना गया, दिल तो दिल था समुद्र का साहिल नहीं, लिख दिया नाम तो फिर मिटाया ना गया |

767. मेरा और उस चाँद का मुकद्दर एक जैसा है, वो तारों में तन्हा है और मैं हजारों में तन्हा।

768. आग सूरज में होती है जलना ज़मीन को परता हैं मोब्बत निगाहैं करती हैं तरपना दिल को परता हैं |

769. उल्फत की जंजीर से डर लगता हैं, कुछ अपनी ही तकदीर से डर लगता हैं, जो जुदा करते हैं, किसी को किसी से, हाथ की बस उसी लकीर से डर लगता हैं |

770. एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तन्हाई भी।

771. रंजिश ही सही दिल को दुखाने के लिए आ, आ फिर से मुझे छोड़ जाने के लिए आ, कुछ तो मेरे इश्क़ का रहने दे भरम, तू भी तो कभी मुझे मनाने के लिए आ।

772. अब तो तेरे लिये हम अजनबी हो गये, बातों के सिलसिले भी कम हो गये, खुशियो से ज्यादा गम हो गये, क्या पता ये वक्त बुरा हे या बुरे हम हो गये |

773. ऐ शम्मा तुझपे ये रात भारी है जिस तरह, हमने तमाम उम्र गुजारी है उस तरह।

774. कश्ती के मुसाफिर ने समन्दर नहीं देखा, आँखों को देखा पर दिल मे उतर कर नहीं देखा, पत्थर समझते है मेरे चाहने वाले मुझे, हम तो मोम है किसी ने छूकर नहीं देखा।

775. तपिश से बच कर घटाओं में बैठ जाते हैं, गए हुए की सदाओं में बैठ जाते हैं, हम अपनी उदासी से जब भी घबराये, तेरे ख़याल की छाँव में बैठ जाते हैं |

776. तुम्हारे बगैर ये वक़्त ये दिन और ये रात, गुजर तो जाते हैं मगर गुजारे नहीं जाते।

777. किसी के साथ जो की थीं वफ़ाएं याद करती हैं, हमारी धूप को ठंडी हवाएं याद करती हैं. कभी होंठों से हमने उनकी बूंदों को नहीं छूआ, हमारी प्यास को अब वो घटाएं याद करती हैं |

778. जिनके दिल पे लगती है चोट वो आँखों से नही रोते, जो अपनो के ना हुए किसी के नही होते, मेरे हालातों ने मुझे ये सिखाया है, की सपने टूट जाते हैं पर पूरे नही होते |

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779. उसके दिल में थोड़ी सी जगह माँगी थी मुसाफिरों की तरह, उसने तन्हाईयों का एक शहर मेरे नाम कर दिया।

780. हमेशा के लिए अपने पास रख लो ना मुझे कोई पूछे तो कह देना किरायेदार है दिल का |

781. यूं तन्हाई मे बैठे ही मुस्करा लेते थे, जानते थे कि तुम साथ नहीं हो, आज सही मायनों मे साथ हो पर, मुस्कराने की वजह साथ नही |

782. जब महफ़िल में भी पास हो, रोशनी में भी अँधेरे का एहसास हो, तब किसी खास की याद में मुस्कुरा दो, शायद वो भी आपके इंतजार में उदास हो।

783. हुआ था शोर पिछली रात को दो “चाँद” निकले हैं, बताओ क्या ज़रूरत थीं “तुम्हे” छत पर टहलने की |

784. हर आहट पर तेरी ही तलाश है, आंखो को तेरी ही प्यास है, ना यााद आओ हमें इतना कि दिल हमेशा पूछे, धड़कन किसके पास है |

785. हम अंजुमन में सबकी तरफ देखते रहे, अपनी तरह से कोई हमें अकेला नहीं मिला।

786. मेरे आसु कुछ नही तेरी हसी के आगे मेरा गम कुछ नही तेरी खुशी के आगे तु कहे तो मर जाये हम मगर मेरी मौत भी कुछ नही तेरी जिंदगी के आगे |

787. ख़ामोश फ़ज़ा थी कहीं साया भी नहीं था, इस शहर में हमसा कोई तनहा भी नहीं था, किस जुर्म पे छीनी गयी मुझसे मेरी हँसी, मैंने किसी का दिल तो दुखाया भी नहीं था |

788. वो भी बहुत अकेला है शायद मेरी तरह, उस को भी कोई चाहने वाला नहीं मिला।

789. हर दिन, रात होने का इंतज़ार करता हूँ, हर रात तेरे साथ होने का इंतज़ार करता हूँ।

790. कागज़ पे हमने भी ज़िन्दगी लिख दी, अश्क से सींच कर उनकी खुशी लिख दी, दर्द जब हमने उबारा लफ्जों पे, लोगों ने कहा वाह क्या गजल लिख दी |

791. मेरी यादें मेरा चेहरा मेरी बातें रुलायेंगी, हिज़्र के दौर में गुज़री मुलाकातें रुलायेंगी, दिनों को तो चलो तुम काट भी लोगे फसानों में, जहाँ तन्हा मिलोगे तुम तुम्हें रातें रुलायेंगी।

792. ये लब चाहे खामोश रहें आँखों से पता चल जाता है कोई लाख छुपा ले इश्क मगर दुनिया को पता चल जाता है |

793. जो लोग एक तरफा प्यार करते है, अपनी ज़िन्दगी को खुद बर्बाद करते है, नहीं मिलता बिना नसीब के कुछ भी, फिर भी लोग खुद पर अत्याचार करते है |

794. क्या लाजवाब था तेरा छोड़ के जाना, भरी भरी आँखों से मुस्कुराये थे हम, अब तो सिर्फ मैं हूँ और तेरी यादें हैं, गुजर रहे हैं यूँ ही तन्हाई के मौसम।

795. सैकड़ों शिकायतें रट रखी थी, उन्हें सुनाने को किताबों की तरह वो मुस्कुरा के ऐसे मिले कि एक भी याद नहीं आई |

796. आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा, पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला, मैं मोम हूँ उसने मुझे छू कर नहीं देखा |

797. ना जाने क्यूँ खुद को अकेला सा पाया है, हर एक रिश्ते में खुद को गँवाया है। शायद कोई तो कमी है मेरे वजूद में, तभी हर किसी ने हमें यूँ ही ठुकराया है।

798. अगर मै हद से गुज़र जाऊ तो मुझे माफ़ करना, तेरे दिल में उत्तर जाऊ तो मुझे माफ़ करना, रात में तुझे देख के तेरे दीदार के खातिर, पल भर जो ठहर जाऊ तो मुझे माफ़ करना |

799. सदीयो से जागी आँखो को एक बार सुलाने आ जाओ, माना की तुमको प्यार नहीं नफरत ही जताने आ जाऔ, जिस मोङ पे हमको छोङ गये हम बैठे अब तक सोच रहे, क्या भुल हुई क्यो जुदा हुए बस यह समझाने आ जाओ |

800. सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई, दुनिया की वही रौनक दिल की वही तन्हाई।